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क्या भविष्य को जाना जा सकता है।

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 भविष्य को जानने की इच्छा सबको होती है, पर सत्य तो ये है कोई ऐसा ईश्वर नही जिसने ,आपका भविष्य लिख कर उसे निश्चित कर दिया हो। हम ही रोज अपने भविष्य का निर्माण करते हैं ,चाहे अनजाने में करे या सोच समझ कर करे। ये बात अजीब लग सकती है ,पर सत्य यही है हमारे विश्वास ,हमारी धारणाए, हमारे विचार ,हमारे कर्म व हमारी भावनाए ही हमारे जीवन के रचनाकार है। ईश्वर तो वो ऊर्जा है जो सब संचालित कर रही है। हमारी सकरात्मक ऊर्जा हमें प्रभु से जोड़ देती है वही नकारात्मकता हमें ईश्वरीय ऊर्जा से अलग कर देती है। हम यदि जागरूकता का अभ्यास करें तो हर पल चेतना से जुड़े रह सकते है पर ये कहना सरल है करना मुश्किल। इसके लिए जागरूकता, प्रेम व शांति की आवश्यकता है। अभ्यास की आवश्यकता है। अपने आप को सच्चाई से स्वीकार करें अपनी भावनाओं को ईमानदारी से पहचाने, अपनी चेतना से जुड़े इसमें थोड़ा प्रयास लगेगा ।अपने आप पर काम करना मुश्किल जरूर है पर ये काम आपका जीवन आसान कर देगा। " रचना करे अपने भविष्य की ईश्वरीय ऊर्जा के साथ" मीनाक्षी गुप्ता Cartomancer

जीवन की अनिश्चितता का आनन्द ले

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 यदि हम वर्तमान में होते हैं तो चिंता व अपराध बोध हो ही नही सकते क्योंकि अपराधबोध हमे भूतकाल में होने पर होता है व चिंता हमे भविष्य के विचारों में होने से होती है।इसलिए जब भी ये भाव परेशान कर तो  समझे आपको इसी क्षण में जागरूक होना है जो हो गया उसे जाने दे अभी वर्तमान को भविष्य के निर्माण के लिए प्रयोग करे तो चिंता के लिए समय नही बचेगा। वैसे भी बीते कल व आने वाले कल पर हमारा कोई वास्तविक नियंत्रण नही है।अभी इस क्षण पर ही कर्म की शक्ति हमे प्राप्त है। परिणाम तो वैसे भी बहुत सारी अलग अलग संभावनाओं पर निर्भर करता है इसलिए इसे हम अकेले निर्धारित नही करते है। हम अपनी भावनाओं ,विचार व वर्तमान के कार्य मे ही एकाग्र होकर सुधार कर सकते है। आप अपने हिस्से का कार्य करे वो ही सोचे व कल्पना करे जो आप चाहते है शेष छोड़ दे।कितना भी कस के पकड़ेगे पर समय निरन्तर चलायमान है इसलिए परिवर्तित होता रहेगा। थोड़ा सहज हो ,आराम से कार्य करे,आराम से बोले व किसी परिणाम के लिये बैचेन न हो । अपना सर्वश्रेष्ठ दे बाकी आपके नियंत्रण में नही है।अनिश्चितता का आंनद ले । मीनाक्षी गुप्ता Cartomancer